नई दिल्ली, 27 अप्रैल । ईरान के कोस्ट गार्ड ने 25 अप्रैल को ओमान के शिनास आउटर पोर्ट के पास टोगो के झंडे वाले केमिकल टैंकर ‘एमटी सिरोन’ पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। इस टैंकर पर भारतीय नाविकों सहित कई लोग सवार थे। यह जानकारी सोमवार को पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने दी।
बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक मंदीप सिंह रंधावा ने एक बैठक में बताया कि जहाज दूसरे जहाजों के पास था, तभी ईरानी कोस्ट गार्ड ने दखल दिया और चेतावनी के तौर पर फायरिंग की।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय, विदेश मंत्रालय (एमईए), भारतीय मिशनों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ मिलकर लगातार संपर्क में है, ताकि नाविकों की सुरक्षा बनी रहे और कामकाज प्रभावित न हो।
रंधावा के मुताबिक, डीजी शिपिंग का कंट्रोल रूम अब तक 7,780 कॉल और 16,650 ईमेल संभाल चुका है। वे 2,770 भारतीय जहाजों के संपर्क में हैं, जिनमें से 12 ने हालात की जानकारी दी है। हम स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और फिलहाल चिंता की कोई बात नहीं है।
इससे पहले 22 अप्रैल को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में एक जहाज पर हमला किया था, जो भारत के मुंद्रा पोर्ट जा रहा था। यह हमला उस समय हुआ जब कुछ ही घंटे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अनिश्चितकालीन युद्धविराम की घोषणा की थी।
ईरान की सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी (आईआरजीसी-एन) ने दो जहाजों पर हमला कर उन्हें अपने कब्जे में लेने की बात कही थी।
आईआरजीसी-एन ने इन जहाजों के नाम ‘एमएससी फ्रांसेस्का’ और ‘एपामिनोडास’ बताए।
दो शिपिंग मॉनिटरिंग साइट्स के अनुसार, लाइबेरिया के झंडे वाला ‘एपामिनोंडास’ जहाज दुबई के जेबेल अली बंदरगाह से गुजरात के मुंद्रा की ओर जा रहा था।
18 अप्रैल को भी ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में दो भारतीय जहाजों पर हमला किया था, जिन्हें वहां से गुजरने की अनुमति मिली हुई थी। भारत ने इस पर कड़ा विरोध जताया था।
आईआरजीसी-एन का कहना था कि इन जहाजों पर हमला इसलिए किया गया, क्योंकि वे बिना अनुमति के काम कर रहे थे। एक ब्रिटिश नेवी मॉनिटरिंग एजेंसी ने भी पुष्टि की कि आईआरजीसी की गनबोट्स ने दो जहाजों पर फायरिंग की, जिनमें से एक चलने लायक नहीं रहा और दूसरा क्षतिग्रस्त हो गया।





