जंतर-मंतर निगरानी मामले में केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट में रखा पक्ष, प्रदर्शनों की वीडियो रिकॉर्डिंग कानून-व्यवस्था के लिए जरूरी

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर निगरानी और निजता के अधिकार से जुड़े मामले की सुनवाई 27 जुलाई तक के लिए टाल दी है। मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और याचिकाकर्ता की ओर से निजता के अधिकार और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी को लेकर दलीलें पेश की गईं। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर निजता के अधिकार का दावा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक प्रदर्शनों की वीडियो रिकॉर्डिंग कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक स्वीकृत प्रक्रिया है। तुषार मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जारी स्थायी आदेश के तहत बड़े प्रदर्शनों की रिकॉर्डिंग की जाती है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी अप्रिय घटना की स्थिति में दोषियों की पहचान करने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग जरूरी होती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब प्रदर्शनकारी खुद भी वीडियो बनाते हैं और उसे साझा करते हैं तो सार्वजनिक स्थान पर पूरी निजता की उम्मीद नहीं की जा सकती। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निजता के अधिकार से जुड़े फैसले में साफ किया गया है कि सार्वजनिक स्थानों और प्रदर्शनों के दौरान भी लोगों को निजता का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की निगरानी करने के लिए कानून, तय प्रक्रिया और सुरक्षा उपायों का होना जरूरी है। याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मी कैमरों के जरिए 16 से 19 साल के युवाओं की रिकॉर्डिंग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ खबरों में एआई आधारित चेहरा पहचान प्रणाली वाली गाड़ियों के इस्तेमाल की बात सामने आई है, जबकि पुलिस ने अदालत में केवल वीडियो रिकॉर्डिंग की जानकारी दी है। वकील ने कहा कि चेहरा पहचान प्रणाली के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर कार्रवाई हो सकती है, इसलिए निगरानी के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था और डेटा सुरक्षा के नियम जरूरी हैं। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि निगरानी और निजता से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अदालत को पहले अपना रुख तय करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसी विषय से जुड़ी कुछ अन्य याचिकाएं 12 सितंबर को सूचीबद्ध हैं। अदालत ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता चाहे तो इस मामले को उन याचिकाओं के साथ जोड़ने का अनुरोध कर सकता है। हालांकि याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पहले से लंबित याचिकाएं 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई से जुड़ी हैं, जबकि उनकी याचिका उससे पहले दाखिल की गई थी और इसका मुख्य मुद्दा निगरानी तथा निजता का अधिकार है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को तय की है।

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