नई दिल्ली: भारत ने जुलाई 2026 में रूस से कच्चे तेल के आयात का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत ने जुलाई के दौरान रूस से औसतन 2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन (MBPD) कच्चे तेल का आयात किया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे पहले जून 2026 में रूस से लगभग 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का आयात दर्ज किया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलती परिस्थितियों और रियायती कीमतों पर उपलब्ध रूसी तेल ने भारत की आयात रणनीति को मजबूत किया है। यही कारण है कि रूस लगातार भारत के लिए सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत
जुलाई 2026 में भारत का कुल कच्चे तेल का आयात लगभग 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन रहा। इसमें अकेले रूस की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में रूसी तेल की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है।
रूस से आयातित कच्चा तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए लागत कम करने में मददगार साबित हो रहा है। इससे घरेलू ईंधन आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के साथ-साथ आयात लागत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
रूस बना भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
बीते कुछ वर्षों में रूस ने भारत के तेल आयात बाजार में तेजी से अपनी स्थिति मजबूत की है। पहले जहां भारत मुख्य रूप से मध्य-पूर्व के देशों से कच्चा तेल खरीदता था, वहीं अब रूस सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिस्पर्धी कीमतों, नियमित आपूर्ति और दीर्घकालिक व्यापारिक समझौतों के कारण भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिली है।
भारतीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ
रियायती दरों पर मिलने वाला रूसी कच्चा तेल भारतीय तेल कंपनियों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। कम लागत पर तेल उपलब्ध होने से रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन में सुधार होता है और ईंधन आपूर्ति पर दबाव कम रहता है। इसका अप्रत्यक्ष लाभ उद्योगों और उपभोक्ताओं तक भी पहुंच सकता है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक परिस्थितियों और वैश्विक प्रतिबंधों जैसे कारकों पर भारत की आयात नीति भविष्य में भी निर्भर करेगी।
निष्कर्ष
जुलाई 2026 में रूस से 2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल का रिकॉर्ड आयात भारत की ऊर्जा रणनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। कुल आयात में 55 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। यदि आने वाले महीनों में भी यही रुझान जारी रहता है, तो भारत को ऊर्जा सुरक्षा, आयात लागत और आर्थिक स्थिरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है।





