तंजावुर में ‘सांबा सीजन’ के लिए बीज विक्रेताओं पर कड़ी निगरानी, सिर्फ तय किस्मों की बिक्री के निर्देश

तंजावुर, 20 अगस्त (आईएएनएस)। तमिलनाडु के तंजावुर जिले में सांबा सीजन की खेती शुरू होने से पहले निजी बीज विक्रेताओं के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी की गई हैं। प्रशासन ने कहा है कि दुकानदार सिर्फ सांबा सीजन के लिए उपयुक्त धान की किस्में ही बेचें और बीज प्रमाणन व रिकॉर्ड रखने के नियमों का कड़ाई से पालन करें।

‘सांबा सीजन’ मुख्य रूप से तमिलनाडु में धान की खेती का एक प्रमुख कृषि मौसम है। यह आमतौर पर अगस्त से लेकर जनवरी तक चलता है।

बीज निरीक्षण के उप निदेशक सुजाता ने एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि जिलेभर के किसान सांबा की खेती की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें इस मौसम के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराना जरूरी है।

बिक्री के लिए रखे गए प्रमाणित बीज के पैकेट पर दो टैग लगाने जरूरी होंगे, जिसमें एक प्रमाणन टैग और एक जानकारी वाला टैग शामिल हैं। दोनों टैग सफेद या नीले रंग के होने चाहिए। जानकारी वाले टैग पर बीज अधिनियम के अनुसार 14 जरूरी बातें लिखी होनी चाहिए। इसमें फसल का नाम, किस्म, बैच नंबर, एक्सपायरी तारीख और बीज किस सीजन के लिए उपयुक्त है, यह सब शामिल है।

सभी निजी डीलरों को बीज स्टॉक रजिस्टर और अंकुरण रिपोर्ट रखनी होगी। हर लॉट का स्टॉक अलग-अलग पन्नों पर दर्ज करना होगा ताकि जांच और निगरानी में आसानी हो।

अधिकारी ने कहा कि 150 से 160 दिन में तैयार होने वाली लंबी अवधि की धान की किस्में इस सांबा सीजन के लिए सबसे उपयुक्त हैं।

डीलरों को पहले सावित्री सीआर 1009, सीआर 1009 सब-1 और एडीटी 51 जैसी किस्मों को प्राथमिकता देने को कहा गया है। इसके बाद एडीटी 38, एडीटी 39, एडीटी 42, एडीटी 46, व्हाइट पोन्नी, आईआर 20, सीओ 43, सीओ 46, सीओ 50 और इम्प्रूव्ड व्हाइट पोन्नी जैसी मध्यम अवधि की किस्में बेची जा सकती हैं।

तमिलनाडु के बाहर की किस्में जैसे बीपीटी 5204, एमटीयू 7029, एनएलआर 34449 और केएनएम 1638 बेचने पर डीलरों को फॉर्म II का रिकॉर्ड रखना होगा। साथ ही हर किसान को बीज खरीदने पर पक्की रसीद देना भी अनिवार्य है।

जिले में निजी दुकानों पर बिक्री के लिए लगभग 2,750 टन लंबी और मध्यम अवधि के धान के बीज का स्टॉक किया गया है।

बीज की अंकुरण गुणवत्ता जांचने के लिए कुंभकोणम, तंजावुर और पट्टुकोट्टई में तैनात बीज निरीक्षक आधिकारिक सैंपल ले रहे हैं। इन सैंपलों को जांच के लिए तंजावुर की बीज परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा जा रहा है।

सुजाता ने चेतावनी दी कि सांबा सीजन के लिए अनुपयुक्त किस्मों की बिक्री या नियमों का उल्लंघन करने पर बीज अधिनियम 1966, बीज नियम 1968 और बीज नियंत्रण आदेश 1983 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

डीलरों से कहा गया है कि किसान को बीज देने से पहले हर लॉट का लेबल, अंकुरण रिपोर्ट और सीजन के हिसाब से उपयुक्तता जरूर जांच लें। इसमें किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।

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