पटना। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के तहत पाटलिपुत्र जंक्शन से भगवान सोमनाथ के दर्शन के लिए 1,150 श्रद्धालुओं के जत्थे को विशेष ट्रेन के माध्यम से रवाना किया। मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को विदाई दी। उन्होंने यात्रियों से मुलाकात की, ट्रेन में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया और सभी श्रद्धालुओं की सुखद एवं मंगलमय यात्रा की कामना की। राज्य सरकार की इस पहल को धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और सनातन आस्था को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दीप प्रज्वलन, डमरू वादन और शंखध्वनि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहारवासियों की ओर से श्रद्धालु शोभा सिंह को कलश और अजीत कुमार को ध्वज भेंट किया। आयोजन ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व- अटूट आस्था की गौरव गाथा’ की भावना के अनुरूप श्रद्धा, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय गौरव के वातावरण में संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार के विभिन्न जिलों से आए 1,150 श्रद्धालु इस पावन यात्रा में शामिल हो रहे हैं। यात्रा के साथ भेजे जा रहे ध्वज और कलश बिहार की आस्था, स्वाभिमान और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि यात्रा के दौरान वे जहां भी जाएं, वहां बिहार की गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा और सनातन मूल्यों का संदेश भी पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि सरकार ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए समुचित व्यवस्था की है। भगवान सोमनाथ के आशीर्वाद से गुजरात और पूरा देश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। भगवान सोमनाथ की कृपा से बिहार भी विकास, समृद्धि और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए शिखर पर पहुंचेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के साथ काशी विश्वनाथ के भी दर्शन करने और बिहार की सुख-शांति, समृद्धि तथा सर्वांगीण विकास के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया। सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग एक हजार वर्ष पूर्व सोमनाथ मंदिर पर विदेशी आक्रांताओं ने हमला कर उसे लूटा था और नालंदा विश्वविद्यालय को भी नष्ट कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में 75 वर्ष पूर्व सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, जिसमें देश के प्रथम राष्ट्रपति और बिहार के गौरव डॉ. राजेंद्र प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों से नालंदा विश्वविद्यालय का पुनर्स्थापन भी हुआ, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत के पुनर्जागरण का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि बिहार की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना को पूरे देश तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। राज्य सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने, ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक संजय सरावगी ने भी संबोधित किया।
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