पितृ पक्ष में काले तिल का दान क्यों होता है अनिवार्य, जानें क्या है मान्यता
नई दिल्ली, 22 सितंबर पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान का विशेष महत्व होता है। इस पूरे कर्मकांड में एक चीज सबसे ज्यादा जरूरी मानी जाती है, वो है काले तिल। मान्यता है कि काले तिल के बिना किया गया श्राद्ध, तर्पण या दान अधूरा है और पितरों तक नहीं पहुंचता।
पितृ पक्ष को पूर्वजों को याद कर उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है।
इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों की तृप्ति के लिए जल, अन्न और वस्त्र का दान करते हैं लेकिन शास्त्रों के अनुसार अगर इन सभी क्रियाओं में काले तिल का उपयोग न किया जाए तो पितृ अप्रसन्न हो जाते हैं।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार
काले तिल की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई है। इसलिए इसे अत्यंत पवित्र माना गया है। किसी भी पूजा-पाठ की तरह ही पितृ पक्ष के कर्मों में भी इसका उपयोग शुभ और अनिवार्य माना जाता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से काले तिल का सीधा संबंध शनि और राहु-केतु जैसे छाया ग्रहों से है।
श्राद्ध के दौरान काले तिल का दान करने से कुंडली में मौजूद पितृ दोष और शनि दोष शांत होते हैं। यह जीवन में आ रही बाधाओं को दूर कर सुख-समृद्धि लाता है।
काले तिल में नकारात्मक ऊर्जा को सोखने की शक्ति होती है।
यह वातावरण को शुद्ध करता है। पितृ पक्ष में इसका उपयोग करने से श्राद्ध स्थल पवित्र होता है और बुरी शक्तियां दूर रहती हैं।
सबसे बड़ी मान्यता यह है
कि बिना तिल के अर्पण किया गया जल और भोजन दुष्ट आत्माएं ग्रहण कर लेती हैं, जबकि काले तिल के साथ किया गया तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचता है। इससे उनकी आत्मा को तृप्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में कहा गया है
कि पितृ पक्ष में आप चाहे किसी भी चीज का दान करें, उसके साथ काले तिल जरूर दान करें। तर्पण के जल में काले तिल डालना और जरूरतमंद को काले तिल का दान करना, पूर्वजों के आशीर्वाद को पाने का सबसे सरल उपाय है।
अगर आप पितृ पक्ष में श्राद्ध करते समय काले तिल का दान करना भूल जाते हैं,
तो यह बड़ी भूल मानी जाती है। इसके बिना न तो आपका दान स्वीकार होता है और न ही पितर तृप्त होते हैं। इसलिए पितृ पक्ष में इस नियम का पालन जरूर करना चाहिए।





