बलूचिस्तान के सीएम की बागानों को जलाने की धमकी पर मानवाधिकार संगठन ने जताई चिंता

क्वेटा, 29 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मानवाधिकार की अनदेखी को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने शनिवार को प्रांतीय मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के उस बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें उन्होंने मस्तुंग जिले में स्थानीय लोगों के बागानों को “जलाने और ध्वस्त करने” तथा उनके मालिकों को गिरफ्तार करने की चेतावनी दी थी।

मानवाधिकार संगठन बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने बुगती की टिप्पणियों को “बेहद चिंताजनक और निंदनीय” बताते हुए कहा कि नागरिकों की संपत्ति और आजीविका के साधनों को निशाना बनाने की धमकी मौलिक मानवाधिकारों, संपत्ति के अधिकार और आजीविका के अधिकार को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।

पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट डेली दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, बुगती ने शुक्रवार को क्वेटा स्थित सेंट्रल पुलिस ऑफिस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यदि मस्तुंग के बागानों से प्रांतीय गृह मंत्री या सुरक्षा बलों पर हमले होते हैं, तो संबंधित बागान मालिकों को भी हमलावरों का मददगार माना जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि निजी संपत्तियों का इस्तेमाल कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों के लिए जारी रहा तो सरकार के पास दो विकल्प होंगे: पहला, बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों को वहां से हटाकर दूसरी जगह बसाना, और दूसरा कथित तौर पर ऐसी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा रहे बागानों को “खत्म” कर देना।

बीवीजे ने कहा कि बलूचिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति पहले से ही गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बागानों को जलाने की धमकी उनकी आजीविका और आय के स्रोतों को खतरे में डाल सकती है तथा इसे स्थानीय आबादी पर सामूहिक दबाव या सामूहिक दंड के रूप में देखा जा सकता है।

संगठन ने कहा कि बागानों को जलाने या ध्वस्त करने और उनके मालिकों को गिरफ्तार करने की धमकी नागरिकों के आर्थिक और मौलिक मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन होगी।

बीवीजे ने पाकिस्तानी अधिकारियों से नागरिकों को डराने-धमकाने, उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या उन्हें सामूहिक दंड देने वाली किसी भी कार्रवाई से बचने की अपील की। संगठन ने मस्तुंग के स्थानीय लोगों के मानवाधिकारों, आर्थिक अधिकारों और संपत्ति के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की।

इस बीच, बलूच नागरिकों के खिलाफ हिंसा के आरोपों के बीच बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने कराची के मलिर जिले में ‘‘एजुकेशन सिटी’’ परियोजना के नाम पर पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा कृषि भूमि पर कब्जे का आरोप लगाया है।

बीवाईसी ने स्थानीय बलूच समुदाय को जबरन हटाए जाने की आलोचना करते हुए इसे ‘‘अस्वीकार्य’’ बताया।

संगठन के अनुसार, बलूच समुदाय सदियों से मलिर में रह रहा है और वहां की जमीन, कृषि व्यवस्था तथा स्थानीय सामाजिक जीवन उसकी ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा हैं। बीवाईसी ने आरोप लगाया कि परियोजना के नाम पर इन जमीनों को स्थानीय आबादी से लेने की कोशिश उनकी ऐतिहासिक और सामूहिक पहचान को कमजोर करने की नीति का हिस्सा है।

बीवाईसी ने दावा किया कि एजुकेशन सिटी परियोजना मलिर के छह गांवों में करीब 20,000 एकड़ भूमि को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा 80 से अधिक बस्तियां, प्राचीन कब्रिस्तान, ऐतिहासिक स्थल और कृषि भूमि भी खतरे में हैं।

संगठन ने कहा कि परियोजना के लिए लगभग 1,000 एकड़ जमीन के तत्काल अधिग्रहण की प्रक्रिया स्थानीय आबादी के भूमि संबंधी अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

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