बांग्लादेश: 24 घंटे में खसरे जैसे लक्षणों से 7 मासूमों की मौत

बांग्लादेश: 24 घंटे में खसरे जैसे लक्षणों से 7 मासूमों की मौत

ढाका, 11 अक्टूबर बांग्लादेश में साढ़े सात महीने बाद भी खसरे या खसरे जैसे लक्षणों के कारण बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। रविवार सुबह 8:00 बजे तक के 24 घंटों में सात बच्चों की मौत हो गई, जिससे इस साल देश में खसरे से जुड़ी कन्फर्म और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या 1,162 हो गई है।

डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज

(डीजीएचएस) ने सात मौतों को संदिग्ध खसरे की श्रेणी में डाला है। इस दौरान इस संक्रामक बीमारी से किसी के भी मौत की पुष्टि नहीं की गई है।

इसके साथ ही,

संदिग्ध खसरे से हुई मौतों की कुल संख्या 1,058 हो गई है, जबकि खसरे से कन्फर्म मौतों की संख्या 104 पर ही बनी हुई है। 24 घंटे की इस अवधि में खसरे के कुल 1,180 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे देश भर में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 205,028 हो गई।

वहीं, खसरे के 93 नए कन्फर्म मामले दर्ज किए गए,

जिससे लैब में कन्फर्म हुए संक्रमणों की संख्या 22,421 तक पहुंच गई।

डीजीएचएस के अनुसार,

इस साल 15 मार्च से अब तक देश भर में खसरे के संदिग्ध लक्षणों वाले कुल 182,047 मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से 174,469 मरीज ठीक हो चुके हैं। रिपोर्ट में इसके लिए अंतरिम सरकार के उस फैसले को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिसके तहत सितंबर 2025 में यूनिसेफ के जरिए वैक्सीन खरीद रोक दी गई थी।

बांग्लादेश के अखबार

‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट में ओपन टेंडर प्रोसेस (खुली निविदा प्रक्रिया) की आलोचना की गई थी।

दैनिक ने ‘साइंस डॉट ओआरजी’ की रिपोर्ट का हवाला दिया जिसमें कहा गया 

पूर्व की अंतरिम सरकार की ढुलमुल नीतियों के कारण रूटीन टीकाकरण में व्यवधान आया और बीमारी तेज गति से फैली। इससे पहले, खसरे और रूबेला के टीके की सप्लाई के लिए सरकार लंबे समय से यूनिसेफ पर निर्भर थी, जिसके लिए मुख्य रूप से ‘गावी’ और सरकार से फंड मिलता था।

रिपोर्ट के अनुसार,

यह बीमारी जनवरी में म्यांमार सीमा के पास रोहिंग्या शरणार्थी कैंपों में शुरू हुई और देश के 64 में से 58 जिलों में फैल गई, जिससे 21,000 से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

सरकारी आंकड़ों से पता चला 

2025 में सिर्फ 59 प्रतिशत योग्य बच्चों को खसरे का टीका लगा था, हालांकि बाद में ये आंकड़े आधिकारिक वेबसाइटों से हटा दिए गए। अफसरशाही की वजह से टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई, जिससे टीके की सप्लाई में कमी आई और रूटीन टीकाकरण प्रभावित हुआ।

आईईडीसीआर के पूर्व प्रिंसिपल साइंटिस्ट एएसएम आलमगीर के अनुसार,

2024 से विटामिन ए वितरण अभियान के नाकाम रहने से बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर हो गई है।

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