बाजार की पाठशाला: एसआईपी और स्टेप-अप एसआईपी में क्या है अंतर? समझें मोटा फंड तैयार करने का पूरा गणित

नई दिल्ली, 3 मई । आज के दौर में सिर्फ बचत करना काफी नहीं है, बल्कि सही तरीके से निवेश करना भी उतना ही जरूरी हो गया है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, ऐसे में अगर आपका पैसा सही जगह निवेश नहीं होता तो उसकी असली वैल्यू कम होती जाती है। यही वजह है कि एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) और स्टेप-अप एसआईपी जैसे विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये आपको अनुशासित निवेश के साथ-साथ लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने का मौका देते हैं।

एसआईपी एक ऐसा तरीका है जिसमें आप हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है और धीरे-धीरे एक अच्छा फंड तैयार हो जाता है।

वहीं स्टेप-अप एसआईपी (या टॉप-अप एसआईपी) एसआईपी का ही एडवांस वर्जन है, जिसमें आप हर साल अपनी निवेश राशि बढ़ाते हैं। यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनकी आय समय के साथ बढ़ती है, जैसे नौकरीपेशा लोग।

उदाहरण के तौर पर अगर आपने 5,000 से शुरुआत की, तो अगले साल इसे 6,000 या 7,000 कर सकते हैं। इससे आपकी इनकम के साथ निवेश भी बढ़ता है और रिटर्न ज्यादा मिलता है, क्योंकि आपको निवेश पर ‘कंपाउंडिंग’ का फायदा मिलता है। कंपाउंडिंग का मतलब होता है ‘ब्याज पर ब्याज मिलना’। यानी आपने जो पैसा निवेश किया, उस पर जो रिटर्न मिला, वह भी आगे जाकर आपके मूल निवेश के साथ जुड़कर और रिटर्न कमाने लगता है।

मान लीजिए आपने 1 लाख रुपए निवेश किया और उस पर 10 प्रतिशत रिटर्न मिला, तो एक साल बाद यह 1.10 लाख रुपए हो जाएगा। अगले साल 10 प्रतिशत रिटर्न 1 लाख रुपए पर नहीं, बल्कि 1.10 लाख रुपए पर मिलेगा। इसी तरह समय के साथ आपका पैसा तेजी से बढ़ता है। एसआईपी और स्टेप-अप एसआईपी दोनों में यही कंपाउंडिंग का जादू आपके फंड को बड़ा बनाता है।

मान लीजिए, अगर कोई निवेशक 10 साल तक हर महीने 5,000 रुपए की एसआईपी करता है और उसे औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, तो उसका कुल निवेश 6 लाख रुपए होगा और यह बढ़कर लगभग 11.5-12 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। अगर वही निवेशक स्टेप-अप एसआईपी अपनाता है और हर साल अपनी एसआईपी में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करता है, तो शुरुआत 5,000 रुपए से होकर धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी। ऐसे में कुल निवेश लगभग 9-10 लाख रुपए के आसपास होगा, लेकिन कंपाउंडिंग और बढ़ती निवेश राशि की वजह से उसका फंड करीब 17-18 लाख रुपए तक पहुंच सकता है।

इससे स्पष्ट है कि स्टेप-अप एसआईपी में थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाने से लंबे समय में बड़ा अंतर पैदा होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, एसआईपी निवेश का एक सरल और अनुशासित तरीका है। यह छोटे निवेशकों के लिए बेहतर है क्योंकि इसमें जोखिम कम होता है और बाजार की टाइमिंग की जरूरत नहीं होती। साथ ही इसके माध्यम से आप नियमित बचत की आदत भी विकसित कर सकते हैं।

वहीं, स्टेप-अप एसआईपी आपको महंगाई को मात देने में मदद करता है। जैसे-जैसे आपकी सैलरी बढ़ती है, आप निवेश भी बढ़ा सकते हैं, जिससे आपका अंतिम फंड काफी बड़ा बनता है। यह लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए ज्यादा प्रभावी तरीका माना जाता है।

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Author: jan news

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