मेरठ। कांवड़ यात्रा और सावन के पावन महीने में श्रद्धालुओं की आस्था के कई रंग देखने को मिल रहे हैं। इसी बीच मेरठ की रहने वाली आरती ने अपनी श्रद्धा, सेवा और पारिवारिक सम्मान की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। आरती ने अपनी सास उषा को विशेष पालकी में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर वापसी की। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि बुजुर्गों के प्रति सम्मान और परिवार के प्रति समर्पण का प्रेरणादायक संदेश भी देती नजर आई।
तस्वीर के मुताबिक, आरती ने कांवड़ यात्रा के दौरान सेवा और समर्पण की भावना को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी सास उषा को कंधों पर पालकी के जरिए यात्रा कराई और हरिद्वार पहुंचकर गंगा से गंगाजल लेकर वापस लौटीं। इस पूरे प्रयास को परिवार और बुजुर्गों के प्रति सम्मान की भावना से जोड़कर देखा जा रहा है।
हरिद्वार से गंगाजल लाने की परंपरा सावन के महीने में विशेष धार्मिक महत्व रखती है। देशभर से बड़ी संख्या में कांवड़िए हरिद्वार और अन्य पवित्र स्थलों पर पहुंचते हैं तथा गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में लौटते हैं। ऐसे माहौल में आरती की यह यात्रा पारिवारिक रिश्तों और धार्मिक आस्था के अनूठे मेल का उदाहरण बन गई है।
आरती ने अपनी सास को पालकी में बैठाकर यात्रा कराते हुए यह संदेश दिया कि बुजुर्ग परिवार की जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि सम्मान और आशीर्वाद का प्रतीक भी होते हैं। आज के दौर में जब व्यस्त जीवनशैली के बीच संयुक्त परिवार और बुजुर्गों की देखभाल को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती हैं, तब इस तरह की पहल समाज के लिए सकारात्मक संदेश देती है।
परिवार के साथ की गई इस यात्रा ने श्रद्धा, पारिवारिक सम्मान और बुजुर्गों के प्रति समर्पण की भावना को सामने रखा है। खास बात यह है कि आरती ने अपनी सास को केवल यात्रा में शामिल नहीं किया, बल्कि उन्हें विशेष सम्मान देते हुए पालकी में बैठाकर हरिद्वार की यात्रा कराई। यह दृश्य कांवड़ यात्रा की धार्मिक भावना के साथ-साथ पारिवारिक संस्कारों की भी झलक दिखाता है।
मेरठ की आरती की यह कांवड़ यात्रा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें धार्मिक आस्था के साथ सेवा और संवेदना का भाव दिखाई देता है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने की इस यात्रा ने यह संदेश दिया कि सच्ची श्रद्धा केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होती, बल्कि अपनों की सेवा और सम्मान में भी दिखाई देती है।





