लचीलापन, सीखने की क्षमता और आगे बढ़ने का जज्बा ही भारत की विकास गाथा की ताकत: पीयूष गोयल

लंदन/नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को कहा कि भारत की शानदार विकास यात्रा लचीलेपन, लगातार सीखने की भावना और असफलताओं को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने के दृढ़ संकल्प से आकार ले रही है। लंदन में आयोजित इंडिया ग्लोबल फोरम की यूके-इंडिया वीक 2026 के दौरान एक बातचीत में गोयल ने कहा कि ऐसे मंच लोगों को एक-दूसरे से सीखने और साझेदारी को मजबूत करने का बेहतरीन अवसर प्रदान करते हैं। अपने शुरुआती शैक्षणिक जीवन को याद करते हुए गोयल ने बताया कि चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई के दौरान उन्हें एक बड़ा झटका लगा था। उन्होंने कहा कि बॉम्बे यूनिवर्सिटी में कानून (लॉ) विषय में दूसरा स्थान हासिल करने के बावजूद चार्टर्ड अकाउंटेंसी की परीक्षा में कानून विषय में अपेक्षा से काफी कम अंक मिलने से वह बेहद निराश हो गए थे। गोयल ने बताया कि परिणाम से असंतुष्ट होकर वह अपनी उत्तर पुस्तिका और अंकों की समीक्षा कराने के लिए दिल्ली तक गए थे। उन्होंने याद किया कि उस दौरान उन्होंने इंस्टीट्यूट के पूर्व अध्यक्ष के.जी. सोमानी के साथ पूरा दिन बिताया था। सोमानी ने उन्हें समझाया कि किसी परीक्षा में प्राप्त अंक या रैंक किसी व्यक्ति के भविष्य को निर्धारित नहीं करते। गोयल के अनुसार, सोमानी ने उन्हें सलाह दी थी कि जीवन में सफलता केवल किसी परीक्षा में पहला या दूसरा स्थान प्राप्त करने से तय नहीं होती। उन्होंने कहा कि भविष्य की दिशा रैंकिंग से नहीं, बल्कि व्यक्ति के प्रयासों, सीखने की क्षमता और आगे बढ़ने की सोच से तय होती है। मंत्री ने कहा कि बाद में उन्हें एहसास हुआ कि वह असफलता वास्तव में उनके लिए एक महत्वपूर्ण सीख थी, जिसने जीवन और सफलता को देखने का उनका नजरिया बदल दिया। पीयूष गोयल ने आगे कहा कि युवा अवस्था में लोग अक्सर रैंकिंग और उपलब्धियों को जरूरत से ज्यादा महत्व देते हैं। लेकिन समय के साथ जीवन हमें चुनौतियों को स्वीकार करना और उनसे सीखकर आगे बढ़ना सिखाता है। उन्होंने कहा कि जीवन के अनुभव, असफलताएं और अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों से मिलने का अवसर व्यक्ति के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं। दैनिक जीवन के उदाहरण देते हुए गोयल ने कहा कि कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें हमेशा योजना बनाकर या नियंत्रित करके नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जैसे लंदन और बेंगलुरु जैसे शहरों में ट्रैफिक की स्थिति का सटीक अनुमान लगाना मुश्किल होता है, उसी तरह जीवन में भी कई परिस्थितियां हमारे नियंत्रण से बाहर होती हैं। मंत्री ने कहा कि मित्रों, सहकर्मियों और विभिन्न कार्यक्रमों में मिलने वाले लोगों के अनुभव हमें नई सीख देते हैं और प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि लगातार सीखते रहना और दूसरों की राय व सुझावों के प्रति खुले रहना व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ देश की प्रगति के लिए भी बेहद जरूरी है। पीयूष गोयल ने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। जो व्यक्ति और देश लगातार सीखते रहते हैं, वही आगे बढ़ते हैं और नई ऊंचाइयों को हासिल करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा भी इसी सोच पर आधारित है, जहां चुनौतियों को अवसर में बदलने और हर अनुभव से सीखने की संस्कृति देश को नई सफलता की ओर ले जा रही है।

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