सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर बोले अरविंद केजरीवाल- संवाद की जगह दमन चुना गया

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन कर रहे शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, सांसद संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज समेत कई नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक विरोध को दबाने की कोशिश बताया। अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर पोस्‍ट में कहा कि सरकार को सोनम वांगचुक से बातचीत करनी चाहिए थी, लेकिन संवाद की जगह जबरदस्ती का रास्ता चुना गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार करने के बजाय सरकार युवाओं के आंदोलन को कुचलने में लगी है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि वांगचुक के साथ की गई कार्रवाई सरकार के अहंकार को दर्शाती है। उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव चाहिए तो सभी को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठानी होगी। उन्‍होंने कहा कि महात्मा गांधी ने भी लंबे समय तक उपवास किए थे, लेकिन उनके साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आजादी इसलिए मिली थी कि अपनी ही सरकार नागरिकों के साथ इस तरह का व्यवहार करे। सोनम वांगचुक और उनके साथ आंदोलन कर रहे लोग अपने लिए नहीं, बल्कि देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि सोनम वांगचुक पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे और सरकार ने इस दौरान उनसे बातचीत की कोई पहल नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च से पहले सरकार ने आंदोलन को रोकने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की। संजय सिंह ने कहा कि युवाओं की आवाज को बलपूर्वक दबाने की कोशिश लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है और सरकार को आंदोलनकारियों से संवाद करना चाहिए था। मनीष सिसोदिया ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि देश के युवा केवल निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर रोक की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय पुलिस बल का प्रयोग कर रही है। सिसोदिया ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति की आवाज को सम्मान दिया जाना चाहिए। दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में आंदोलन को देशभर के युवाओं का समर्थन मिलने लगा था, जिससे सरकार घबरा गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया। भारद्वाज ने युवाओं से 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने की अपील की। वहीं, नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने इस कार्रवाई को ‘शर्मनाक’ बताते हुए कहा कि सरकार बातचीत करने के बजाय पुलिस बल का इस्तेमाल कर रही है। गोपाल राय ने कहा कि देश अब जाग रहा है और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए लोग आगे आ रहे हैं। एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग और विधायक कुलदीप कुमार ने भी पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक विरोध को बलपूर्वक दबाने का प्रयास उचित नहीं है। आम आदमी पार्टी ने पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर संवाद शुरू करने की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि युवाओं की समस्याओं का समाधान बातचीत से निकाला जाना चाहिए, न कि पुलिस कार्रवाई के माध्यम से।

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