हम संवैधानिक दायरे में कर रहे हैं काम, सर्वसम्मति से हो रहे सभी फैसले : चुनाव आयोग
नई दिल्ली, 23 सितंबर भारत निर्वाचन आयोग ने बुधवार को प्रेस नोट जारी कर अपना पक्ष रखा है। आयोग ने कहा है कि वह पूरी तरह से संवैधानिक जनादेश और वैधानिक नियमों के तहत काम कर रहा है।
चुनाव आयोग ने अपने प्रेस नोट संख्या ईसीआई/पीएन/119/2026 में कहा,
“भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है जो संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों और स्थापित संस्थागत परंपराओं के सख्त जनादेश के तहत कार्य करता है। आयोग एक बहु-सदस्यीय संवैधानिक निकाय के रूप में संचालित होता है।”
आयोग ने कहा
लिखित नोट्स, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक संतुलन एवं नियंत्रणपूर्ण पारदर्शिता, कानूनी अनुपालन और परिचालन कठोरता सुनिश्चित करने के लिए मानक प्रक्रियाएं हैं। आयोग के सभी कार्य कानूनों और निर्देशों के अनुसार हुए हैं।
ईसीआई ने स्पष्ट किया
उसके द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेशों, निर्णयों और प्रशासनिक निर्देशों को पूर्ण कानूनी स्वीकृति प्राप्त है और वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 के तहत स्थापित प्रक्रियाओं का पालन करते हैं।
आयोग ने कहा
ड्राफ्ट चरणों के दौरान सदस्यों द्वारा उठाए गए परिचालन संबंधी प्रश्न मानक प्रशासनिक प्रथा का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है। आयोग ने कहा, “किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग विचार और टिप्पणियां सामान्य बात है। वे अंतिम निर्णय से पहले की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। न केवल तीनों आयुक्त बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी मतदाता प्रणाली में सुधार के लिए सुझाव देने के लिए अधिकृत है।”
आयोग ने कहा
10 महीने की अवधि की कुछ आंतरिक टिप्पणियों को उजागर कर एकतरफा तस्वीर पेश की जा रही है। हाल के महीनों में आयोग ने लगभग 40 नई पहल शुरू की हैं और एसआईआर सहित मतदाता सूची संशोधन जैसे कई चुनावी सुधार किए हैं। ये सभी निर्णय पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय हैं।
आयोग ने बताया
इस अवधि में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में प्रमुख चुनावों का सफल संचालन किया गया है।
डेटा सुरक्षा और वोटर लिस्ट से नाम हटाने के आरोपों पर आयोग ने कहा
ईसीआईनेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं ताकि अनधिकृत छेड़छाड़ रोकी जा सके। ईआरओ (निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी) और डीईओ (जिला निर्वाचन अधिकारी) जैसे अधिकारी कानून के तहत ही पंजीकरण और नाम हटाने की वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हैं।
अंत में आयोग ने स्पष्ट किया
वह पूर्ण निष्ठा के साथ अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करने और लोकतंत्र को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।





