नई दिल्ली, 2 मई । भारत में सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश का एक भरोसेमंद विकल्प माना जाता रहा है। आज के समय में निवेशक सिर्फ फिजिकल गोल्ड ही नहीं, बल्कि गोल्ड ईटीएफ, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) और डिजिटल गोल्ड जैसे कई विकल्पों में निवेश कर सकते हैं। हालांकि, इन सभी विकल्पों में निवेश का तरीका अलग है और इन पर लगने वाला टैक्स भी अलग-अलग होता है। चलिए आसान भाषा में समझते हैं कि किस विकल्प पर कितना टैक्स लगता है।
पहले जानते हैं फिजिकल गोल्ड के टैक्स के बारे में। फिजिकल गोल्ड यानी गहने, सिक्के या बिस्किट को आयकर नियमों के अनुसार कैपिटल एसेट माना जाता है। अगर आप इसे खरीदने के 2 साल के अंदर बेचते हैं, तो उस पर मिलने वाला मुनाफा शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (एसटीसीजी) कहलाता है और इस पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।
वहीं, अगर आप इसे 2 साल से ज्यादा समय तक रखते हैं, तो यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) माना जाता है और इस पर 12.5 प्रतिशत फ्लैट टैक्स देना होता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि अब इंडेक्सेशन का फायदा नहीं मिलता। साथ ही, ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज को टैक्स में अलग से नहीं घटाया जा सकता।
वहीं गोल्ड ईटीएफ की बात करें तो यह एक ऐसा निवेश विकल्प है, जिसमें आप बिना फिजिकल गोल्ड खरीदे सोने की कीमत में निवेश कर सकते हैं। इसे खरीदने और बेचने के लिए डिमैट अकाउंट जरूरी होता है।
टैक्स के मामले में, अगर आप ईटीएफ को 1 साल के अंदर बेचते हैं, तो उस पर एसटीसीजी लगेगा और यह आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होगा। वहीं, 1 साल से ज्यादा रखने पर एलटीसीजी माना जाएगा और 12.5 प्रतिशत टैक्स देना होगा।
इसके अलावा, अगर डिजिटल गोल्ड की बात करें तो यह विकल्प आजकल काफी लोकप्रिय हो रहा है, जहां आप मोबाइल ऐप्स के जरिए डिजिटली थोड़ा-थोड़ा सोना खरीद सकते हैं। इसमें कंपनियां आपके लिए सोना सुरक्षित रखती हैं।
टैक्स के मामले में, यह फिजिकल गोल्ड जैसा ही माना जाता है। यानी 2 साल से कम होल्ड करने पर एसटीसीजी और 2 साल से ज्यादा रखने पर 12.5 प्रतिशत एलटीसीजी टैक्स लगता है। लेकिन ध्यान रखें कि यह निवेश अभी पूरी तरह से आरबीआई या सेबी द्वारा रेगुलेट नहीं है, इसलिए इसमें थोड़ा जोखिम भी रहता है।
वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) सरकार द्वारा जारी किए जाते हैं और यह सोने में निवेश का सबसे अलग तरीका है। इसमें आपको 2.5 प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलता है।
जानकारों के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर आप एसजीबी को उसकी पूरी अवधि (8 साल) तक रखते हैं, तो उस पर मिलने वाला कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है। हालांकि, बीच में बेचने पर टैक्स देना पड़ सकता है। ऐसे में 12.5 प्रतिशत एलटीसीजी या स्लैब के अनुसार एस
टीसीजी लागू होगा।





