असम में एनडीए सरकार 12 मई को ले सकती है शपथ, तीसरी बार सत्ता में होगी वापसी

गुवाहाटी, 6 मई । असम में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार 12 मई को शपथ ले सकती है। विधानसभा चुनावों में गठबंधन की निर्णायक जीत के बाद लगातार तीसरी बार सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया है।

 

 

सूत्रों के मुताबिक, एनडीए विधायक दल की बैठक 10 मई को सुबह 10 बजे गुवाहाटी में होगी, जिसमें गठबंधन के विधायक अपने नेता का औपचारिक चुनाव करेंगे। इसके मद्देनजर सभी विजयी एनडीए उम्मीदवारों को 9 मई तक गुवाहाटी पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।

 

बैठक और सरकार गठन की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा तथा हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के भी 9 मई को असम पहुंचने की संभावना है।

 

सूत्रों के अनुसार, विधायक दल की बैठक के बाद एनडीए राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के समक्ष 10 मई की शाम को सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है।

 

हाल ही में संपन्न हुए असम विधानसभा चुनाव में भाजपा-नीत गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है, जिससे मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के एक बार फिर सत्ता में लौटने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

 

इससे पहले मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि संवैधानिक और संगठनात्मक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 11 मई के बाद नई सरकार का गठन और शपथ ग्रहण होगा।

 

राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को इस्तीफा सौंपने के बाद मीडिया से बातचीत में सरमा ने बताया कि चुनाव आयोग ने औपचारिक रूप से चुनाव परिणामों की अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद उन्होंने लोकतांत्रिक परंपरा के तहत अपने मंत्रिपरिषद के साथ इस्तीफा दे दिया।

 

उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर परिणाम घोषित कर राज्यपाल को अधिसूचना सौंप दी है। इसके तुरंत बाद मैंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और वर्तमान असम विधानसभा को भंग करने की सिफारिश भी की।”

 

सरमा ने बताया कि राज्यपाल ने उनकी दोनों सिफारिशें स्वीकार कर ली हैं और नई सरकार के गठन तक मौजूदा सरकार को कार्यवाहक के रूप में काम जारी रखने को कहा है।

 

उन्होंने कहा, “नई सरकार के गठन तक हम कार्यवाहक सरकार के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।”

 

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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