वाराणसी में धार्मिक धरोहरों के पुनरुत्थान को बड़ा बूस्ट, 19.42 करोड़ की 17 परियोजनाएं मंजूर

लखनऊ, 6 मई । प्राचीन आध्यात्मिक नगरी वाराणसी में धार्मिक विरासत के संरक्षण और पर्यटन ढांचे को मजबूत करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य योजना के तहत 1942.66 लाख रुपये की 17 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनका लक्ष्य धरोहरों का कायाकल्प और पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार है।

 

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बुधवार को बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में वाराणसी जनपद की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के लिए 17 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं को कार्यदायी संस्था यूपीएवीपी के माध्यम से समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

उन्होंने बताया कि वाराणसी उत्तरी क्षेत्र में सिटी स्टेशन के पास स्थित उत्तरार्क आदित्य सूर्य मंदिर एवं सूर्य कुंड के विकास के लिए 44 लाख रुपये, सारनाथ स्थित क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय के उच्चीकरण के लिए 12 लाख रुपये तथा कैंट रेलवे स्टेशन पर पर्यटन सूचना केंद्र के उन्नयन के लिए कुल 187 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

 

इसी क्रम में केदारघाट और आसपास के घाटों के विकास के लिए 60 लाख रुपये, बिरदोपुर स्थित आदि शंकराचार्य मठ के लिए 17 लाख रुपये, पिंडरा क्षेत्र के हनुमान मंदिर के लिए 95 लाख रुपये तथा सेवापुरी और रोहनिया क्षेत्रों में विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए करोड़ों रुपये की योजनाएं शामिल हैं।

 

मंत्री ने बताया कि वाराणसी दक्षिण के प्रमुख धार्मिक स्थलों भारत माता मंदिर, दुर्गा मंदिर, काल भैरव मंदिर, संकट मोचन मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, अस्सी घाट, पंचगंगा घाट और दशाश्वमेध घाट के समग्र विकास के लिए 5 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना स्वीकृत की गई है। इसके अलावा नमो घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए साउंड सिस्टम के लिए 50 लाख रुपये और काशी नगरी प्रचारिणी सभा के विकास के लिए 2 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

 

बौद्ध परिपथ से जुड़े स्थलों पर साइनेज कार्यों के लिए 158.91 लाख रुपये भी मंजूर किए गए हैं। जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री की प्रेरणा से काशी की प्राचीन धरोहरों का संरक्षण और पुनरोद्धार तेजी से किया जा रहा है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है, जिसे देखते हुए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार प्राथमिकता पर किया जा रहा है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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