नई दिल्ली, 9 सितंबर 2026: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मामले में जल्द सुनवाई की मांग की गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग पर सीधे आदेश देने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने को कहा। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत के सामने सभी समान हैं।
यह मामला राहुल गांधी की उस कथित टिप्पणी से जुड़ा है, जिसमें भारत-चीन सीमा पर भारतीय सेना की स्थिति को लेकर उन्होंने बयान दिया था। शिकायतकर्ता और पूर्व बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) अधिकारी उदय शंकर श्रीवास्तव ने राहुल गांधी के बयान को मानहानिकारक बताते हुए आपराधिक मानहानि की शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार, राहुल गांधी ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सेना के जवानों को पीटे जाने जैसी टिप्पणी की थी।
मामला आगे बढ़ने के बाद राहुल गांधी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की गई। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि राहुल गांधी की अपील लगभग पांच महीने से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। इसी आधार पर मामले की जल्द सुनवाई की मांग सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई।
CJI ने कहा- सभी के लिए एक समान प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने मामले को जल्द सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। इस दौरान उन्होंने अदालत के समक्ष यह मुद्दा भी उठाया कि राहुल गांधी कोई वीआईपी नहीं हैं और मामले की सुनवाई लंबे समय से लंबित है।
इस पर CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत के सामने सभी बराबर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता से कहा कि यदि मामले की जल्द सुनवाई चाहिए तो इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत औपचारिक आवेदन दाखिल किया जाए। पीठ में CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट का यह रुख फिलहाल मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं है। अदालत ने केवल जल्द सुनवाई की मांग को लेकर प्रक्रिया का पालन करने की बात कही है। यानी मानहानि मामले में राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कानूनी प्रक्रिया पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब राहुल गांधी से जुड़े अन्य मानहानि मामलों पर भी अदालतों में सुनवाई चल रही है। हाल ही में बॉम्बे हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी एक टिप्पणी के मामले में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया था।
अब शिकायतकर्ता को सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए औपचारिक आवेदन दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत उस आवेदन पर विचार करेगी और तय प्रक्रिया के अनुसार मामले को सूचीबद्ध किया जा सकता है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने यह संदेश साफ कर दिया है कि किसी भी पक्ष को विशेष प्राथमिकता नहीं दी जाएगी और सभी के लिए न्यायिक प्रक्रिया समान रहेगी।





