मुंबई, 9 सितंबर 2026: भारत अब अपनी सफल फिनटेक तकनीक, UPI और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) को दुनिया के दूसरे देशों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में कहा कि भारत को अपने डिजिटल वित्तीय समाधानों का इस्तेमाल वैश्विक बाजारों में विस्तार के लिए करना चाहिए। खासतौर पर ग्लोबल साउथ के देशों में भारतीय फिनटेक मॉडल के लिए बड़ी संभावनाएं हैं।
फिनटेक निर्यात को 60-80 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
राजेश अग्रवाल के मुताबिक भारत के वित्तीय सेवा निर्यात को मौजूदा स्तर से कई गुना बढ़ाने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत वैश्विक फिनटेक सेवाओं के कारोबार में करीब 10 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर लेता है तो फिनटेक सेवाओं का निर्यात लगभग 8 अरब डॉलर से बढ़कर 60-80 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
भारत की सेवाओं की अर्थव्यवस्था अभी काफी हद तक आईटी और प्रोफेशनल सेवाओं पर निर्भर है। ऐसे में फिनटेक को सेवाओं के निर्यात के नए क्षेत्र के रूप में विकसित करने पर सरकार का जोर है। इससे देश को विदेशी मुद्रा आय बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
UPI बनेगा भारत की डिजिटल ताकत का आधार
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) दुनिया में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। अब सरकार इसकी पहुंच दूसरे देशों तक बढ़ाने पर जोर दे रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार UPI फिलहाल 11 देशों के साथ जुड़ा हुआ है और कई अन्य देशों के साथ इसे इंटरऑपरेबल बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में UPI को दूसरे देशों की भुगतान प्रणालियों से जोड़ने और खासतौर पर उन देशों में विस्तार करने पर जोर दिया है, जहां भारतीय प्रवासी बड़ी संख्या में रहते हैं या भारत के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत हैं। इससे विदेशों में रहने वाले भारतीयों के लिए भुगतान और पैसे भेजना आसान हो सकता है।
ग्लोबल साउथ में भारतीय मॉडल की मांग
वाणिज्य सचिव ने कहा कि एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के कई देशों के सामने वित्तीय समावेशन, नकदी आधारित अर्थव्यवस्था और डिजिटल भुगतान जैसी चुनौतियां हैं। भारत ने इन क्षेत्रों में डिजिटल तकनीक के माध्यम से जो अनुभव हासिल किया है, उसे दूसरे देशों के लिए उनकी जरूरत के मुताबिक तैयार किया जा सकता है।
भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर व्यवस्था में UPI के साथ-साथ डिजिटल पहचान और अन्य डिजिटल सेवाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। अब इसी अनुभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
रेमिटेंस लागत घटाने पर भी जोर
फिनटेक के वैश्विक विस्तार से विदेशों में काम करने वाले भारतीयों को भी फायदा हो सकता है। राजेश अग्रवाल ने रेमिटेंस की लागत कम करने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि आधुनिक फिनटेक समाधान के जरिए विदेशों से भारत पैसा भेजने की लागत कम की जा सकती है। इससे प्रवासी भारतीयों के हाथ में अधिक पैसा बच सकता है और सीमा-पार वित्तीय लेनदेन आसान हो सकते है।
भारत के लिए बड़ा अवसर
कुल मिलाकर भारत अब सिर्फ फिनटेक का बड़ा उपभोक्ता बाजार बनने के बजाय अपनी डिजिटल भुगतान तकनीक और विशेषज्ञता को दुनिया को निर्यात करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। UPI और DPI को ग्लोबल साउथ तक पहुंचाने की रणनीति भारत के डिजिटल प्रभाव को मजबूत कर सकती है। यदि भारत फिनटेक सेवाओं में वैश्विक हिस्सेदारी बढ़ाने में सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश के सेवा निर्यात और डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।





