नई दिल्ली, 7 सितंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर संस्कृत का सुभाषित शेयर किया। पीएम की ओर से शुक्ल यजुर्वेद संहिता के 36वें अध्याय का 10वां मंत्र, जो प्रकृति के तत्वों (वायु, सूर्य और वरुण) से सुख और कल्याण की प्रार्थना से संबंधित है, उसको साझा किया है।
प्रधानमंत्री की ओर से लिखा गया, “शं नो वातः पवतां शं नस्तपतु सूर्यः। शं नः कनिक्रदद् देवः पर्जन्योऽभिवर्षतु॥” जिसका हिंदी अर्थ है कि हमारे लिए वायु कल्याणकारी, सुखद और शुद्ध होकर बहे, सूर्य देव हमारे लिए कल्याणकारी होकर तपे अर्थात् उनका ताप सुख देने वाला हो और दिव्य गर्जना करने वाले वरुणदेव हमारे ऊपर कल्याणकारी जल की वर्षा करें।
पीएम मोदी की ओर से साझा किया गया यह मंत्र शुक्ल यजुर्वेद के 36वें अध्याय का 10वां मंत्र (वाजसनेयी संहिता) है। यह वेद का एक अत्यंत पवित्र ‘शान्ति मंत्र’ है, जो प्रकृति, मानव और ब्रह्मांड के बीच संतुलन, कल्याण और सुख-समृद्धि की प्रार्थना के संदर्भ में है।
यजुर्वेद हमें कर्मकांड, यज्ञ और प्रकृति के साथ मिलकर जीना सिखाता है। कहा जाता है कि ऋषियों ने यह माना कि मनुष्य का जीवन पूरी तरह से प्रकृति (वायु, सूर्य और जल) पर निर्भर है। यदि हवा में प्रदूषण हो, सूर्य की धूप अत्यधिक विनाशकारी हो जाए, या सूखा/बाढ़ आ जाए, तो मानव जाति का विनाश निश्चित है। इसलिए, इस मंत्र में प्रकृति के तत्वों से प्रकोप न दिखाने बल्कि ‘कल्याणकारी’ यानी (शं) बने रहने की प्रार्थना की गई है।
वैदिक काल से आज तक जीवन और कृषि पूरी तरह से अनुकूल मौसम पर निर्भर हैं। हवा फसलों के लिए परागण और शुद्ध सांस के लिए आवश्यक है। सूर्य प्रकाश संश्लेषण, उर्जा और आरोग्य का कारक है। पर्जन्य (बादल) सही वक्त पर बरसकर धरती को उपजाऊ बनाते हैं, जिससे अन्न उत्पन्न होता है। इस मंत्र के माध्यम से प्रार्थना की गई है कि ये तीनों परिस्थितियां मनुष्यों के अनुकूल रहें, जिससे कि कोई अकाल या भुखमरी न हो।





