शेयर बाजार में गिरावट के बाद तेजी, सेंसेक्स 333 अंक चढ़ा, निफ्टी IT पर दबाव

मुंबई, 16 सितंबर: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक से पहले वैश्विक बाजारों में बने सकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला। लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद घरेलू शेयर बाजार ने वापसी करते हुए बढ़त के साथ कारोबार किया। सेंसेक्स में करीब 333 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी में भी मजबूती देखने को मिली। हालांकि, आईटी शेयरों पर दबाव बना रहा।

बाजार में यह तेजी ऐसे समय में देखने को मिली है, जब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के फैसले पर टिकी हुई है। फेड की बैठक से पहले बाजार में ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और आशंकाएं दोनों बनी हुई हैं। वैश्विक निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक आगे की मौद्रिक नीति को किस दिशा में ले जाएगा। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ता है।

दो दिन की गिरावट के बाद बाजार में सुधार

पिछले दो कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली थी। इसके बाद बुधवार को बाजार ने गिरावट से उबरने की कोशिश की। सेंसेक्स में 333 अंकों की बढ़त ने निवेशकों को कुछ राहत दी। निफ्टी में भी खरीदारी का रुझान दिखाई दिया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने पर आयात लागत और कुछ कंपनियों के खर्च पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।

निफ्टी IT पर सबसे ज्यादा दबाव

जहां व्यापक बाजार में तेजी देखने को मिली, वहीं निफ्टी IT इंडेक्स पर दबाव बना रहा। आईटी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी का असर पूरे आईटी सेक्टर के प्रदर्शन पर पड़ा। अमेरिकी बाजार और वहां की अर्थव्यवस्था से आईटी कंपनियों का कारोबार काफी हद तक जुड़ा हुआ है। इसलिए अमेरिकी ब्याज दरों और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़े संकेतों का असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी दिखाई देता है।

निवेशकों के लिए फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है। ब्याज दरों को लेकर आने वाला फैसला वैश्विक स्तर पर शेयर बाजार, बॉन्ड और मुद्रा बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है।

निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर

बुधवार की तेजी के बावजूद बाजार में पूरी तरह स्थिरता लौटने की तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है। निवेशक वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू आर्थिक आंकड़ों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के प्रदर्शन पर भी नजर रख रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए किसी एक दिन की तेजी या गिरावट के आधार पर निर्णय लेने के बजाय बाजार के व्यापक रुझान और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, दो दिनों की गिरावट के बाद बुधवार को सेंसेक्स में 333 अंकों की बढ़त ने भारतीय शेयर बाजार को राहत दी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले बने वैश्विक संकेत बाजार के प्रमुख कारक बने हुए हैं। वहीं, निफ्टी IT पर दबाव ने सेक्टर आधारित असमान प्रदर्शन को उजागर किया। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेड के फैसले और उसके बाद वैश्विक बाजारों की प्रतिक्रिया पर रहेगी।

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