मुंबई, 9 सितंबर 2026: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। कारोबार के अंत में BSE Sensex 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत गिरकर 74,764.23 अंक पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 में 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,431.50 अंक पर बंद हुआ। दोनों प्रमुख सूचकांक करीब तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए।
कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर के पार
शेयर बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजहों में पश्चिम एशिया का बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जिससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगाई और आयात बिल को लेकर चिंता बढ़ी है। बाजार में आशंका है कि यदि कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा रहा तो कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और आर्थिक विकास पर भी असर पड़ सकता है।
IT शेयरों में भारी बिकवाली
बुधवार को सबसे ज्यादा दबाव IT सेक्टर पर देखने को मिला। Nifty IT इंडेक्स करीब 3.24 प्रतिशत गिरकर दिन का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा। Infosys, HCL Technologies, Tech Mahindra और Wipro जैसे प्रमुख IT शेयरों में भारी बिकवाली हुई। Infosys में करीब 4.34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा रियल्टी इंडेक्स में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट रही। मीडिया, FMCG और प्राइवेट बैंकिंग शेयर भी दबाव में रहे। हालांकि मेटल और एनर्जी सेक्टर ने बाजार को कुछ सहारा दिया और दोनों इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुए।
निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये में कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। बुधवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 95.10 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव से 28 पैसे कमजोर था।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर बुधवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी कमजोर रहा। सेंसेक्स 813 अंक और निफ्टी 203 अंक टूटे, जबकि IT शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। बढ़ते कच्चे तेल के दाम और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण निवेशकों का रुख फिलहाल सतर्क बना हुआ है। आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेतों और तेल की कीमतों पर बाजार की नजर रहेगी।





